उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek do ashk bahati hai chali jati hai

एक दो अश्क बहाती है चली जाती है

ایک دو اشک بہاتی ہے چلی جاتی ہے

शायर: Urooj Zehra Zaidi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक दो अश्क बहाती है चली जाती है
अब तिरी याद भी आती है चली जाती है

वो मिरी दोस्त जिसे बा'द मिरे चाहा था
मुझ से नज़रों को चुराती है चली जाती है

कभी दहशत ने बिगाड़े थे पर अब तन्हाई
ख़ुद मिरे बाल बनाती है चली जाती है

सब्त कर के मिरे माथे पे मिरी हू की मोहर
चाँदनी दर्द बढ़ाती है चली जाती है

ये मोहब्बत भी अजब चीज़ है 'ज़ेहरा-ज़ैदी'
चंद लम्हों को सजाती है चली जाती है