उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ehsas-e-bandagi se begana kar diya hai

एहसास-ए-बंदगी से बेगाना कर दिया है

احساس بندگی سے بیگانہ کر دیا ہے

शायर: Raaz Yazdani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एहसास-ए-बंदगी से बेगाना कर दिया है
इफ़रात-ए-बंदगी ने दीवाना कर दिया है

जो राज़ इत्तिफ़ाक़न मुँह से निकल गया था
वो राज़ एहतियातन अफ़्साना कर दिया है

मैं ने क़दम क़दम पर का'बा बना बना कर
का'बे में एहतिमामन बुत-ख़ाना कर दिया है

लाज़िम है एहतियात अब हर लफ़्ज़-ए-गुफ़्तुगू में
दुनिया ने 'राज़' किस को रुस्वा न कर दिया है