उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se dil ke waste paigham kaise aa gaya

दिल से दिल के वास्ते पैग़ाम कैसे आ गया

دل سے دل کے واسطے پیغام کیسے آ گیا

शायर: Ehsas Muradabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से दिल के वास्ते पैग़ाम कैसे आ गया
मेरे होंटों पर तुम्हारा नाम कैसे आ गया

उन की महफ़िल में हमारा नाम कैसे आ गया
आज ज़िक्र-ए-गर्दिश-ए-अय्याम कैसे आ गया

दिल सी शय ने कैसे रस्म-ए-आरज़ू कर ली क़ुबूल
ताइर-ए-अफ़्लाक ज़ेर-ए-दाम कैसे आ गया

लोग कहते हैं मसर्रत ज़िंदगी का नाम है
फिर ये मुझ पर ज़ीस्त का इल्ज़ाम कैसे आ गया

इशरत-ए-अहद-ए-गुज़शता किस तरह याद आ गई
हाथ में आईना-ए-अय्याम कैसे आ गया

शीशा-ए-दिल बस-कि नाज़ुक इश्क़ की मय तुंद-ओ-तेज़
तुम पे इल्ज़ाम-ए-शिकस्त-ए-जाम कैसे आ गया

फ़िक्र के बादल जबीन-ए-हुस्न पर 'एहसास' क्यूँ
ये सहर के वक़्त ज़िक्र-ए-शाम कैसे आ गया