उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-o-nigah mein jaise Thahar gaya mausam

दिल-ओ-निगाह में जैसे ठहर गया मौसम

دل و نگاہ میں جیسے ٹھہر گیا موسم

शायर: Latif Shah Shahid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ओ-निगाह में जैसे ठहर गया मौसम
तुम्हारे बाद न बदला ये दर्द का मौसम

गुज़र चुके हैं नज़र से हज़ार-हा मौसम
किसी के वादा-ए-शब का न आ सका मौसम

बिछड़ गए हो अगर तुम तो मर न जाऊँगा
बिछड़ के आप से मरने का था जुदा मौसम

ख़िज़ाँ की रुत भी बहारों के साथ चलती है
कहाँ वो बाग़ कि जिस में हो एक सा मौसम

कहाँ ये वस्ल की बे-कैफ़ बे-मज़ा घड़ियाँ
कहाँ वो तेरी जुदाई का ख़ुशनुमा मौसम