उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhup mein baiThe hain bachche hath mein chhagal liye

धूप में बैठे हैं बच्चे हाथ में छागल लिए

دھوپ میں بیٹھے ہیں بچے ہاتھ میں چھاگل لئے

शायर: Parvez Bazmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धूप में बैठे हैं बच्चे हाथ में छागल लिए
सो गईं शायद हवाएँ गोद में बादल लिए

आ रहा है चुप के तालाबों में पत्थर फेंकता
इक जुलूस-ए-कौदकाँ को साथ इक पागल लिए

इन अँधेरी बस्तियों में रख न दरवाज़ा खुला
कौन आता है यहाँ अपनाई की मशअ'ल लिए

ज़ात में गुम-सुम यूँही सड़कों पे दिन भर घूमना
और शब को सोचना पहलू में दिल बे-कल लिए

क्या अजब उस पर महक ही जाएँ दरमाँ के गुलाब
है तो इक शाख़-ए-नज़र उम्मीद की कोंपल लिए

आज तक बे-सम्तियों की रह-रवी ने क्या दिया
अब ज़रा दम ले भी लो 'बज़्मी' बहुत कुछ चल लिए