उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Dhalti raat kahan jaoge batlao baba

ढलती रात कहाँ जाओगे बतलाओ बाबा

ڈھلتی رات کہاں جاؤ گے بتلاؤ بابا

शायर: Partav Rohila6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ढलती रात कहाँ जाओगे बतलाओ बाबा
भोर भए तक इस कुटिया में सो जाओ बाबा

मेरे प्यार बिछौने की सी मीठी मीठी तप
सारी दुनिया घूमो तब भी ना पाओ बाबा

लम्हे लम्हे जीने वाले कल को क्या जानें
मेरी मानो आज यहीं पर रह जाओ बाबा

जीवन मेले में फिर जाने कब मिल पाएँ हम
हाथ छुड़ा कर इतनी जल्दी मत जाओ बाबा

इस ज़िद्दी बालक ने ख़ूँ रुलवाया जीवन भर
चंदा मुख वालो कुछ तुम ही बहलाओ बाबा

यादों की पुर्वाई अंदर कैसे रिसते हैं
आशा के छाले महरूमी के घाव बाबा