उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chamak rahi hai jo aankhon mein raushni ki tarah

चमक रही है जो आँखों में रौशनी की तरह

چمک رہی ہے جو آنکھوں میں روشنی کی طرح

शायर: Aadil Shah5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमक रही है जो आँखों में रौशनी की तरह
वो दिल पे छाई हुई है किसी परी की तरह

लगा के दिल को सजाती है ख़्वाब के जाले
छुपी हुई है ख़यालों में चाँदनी की तरह

क़दम जो रखती है धरती पे गूँज उठती है
कि जैसे साज़ बजे कोई रागनी की तरह

वो एक लम्हा कि जिस में मिला था तू मुझ से
अभी भी ज़िंदा है दिल में किसी सदी की तरह

निगाह डाले जो पल भर वो मेरी जानिब भी
समेट लूँ मैं वो लम्हा किसी ख़ुशी की तरह