उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhigi palkon pe KHwab chhoD gaya

भीगी पलकों पे ख़्वाब छोड़ गया

بھیگی پلکوں پہ خواب چھوڑ گیا

शायर: Jaleel Arshad Khan Rashid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भीगी पलकों पे ख़्वाब छोड़ गया
रतजगों के अज़ाब छोड़ गया

ख़ार सारे समेट कर इक शख़्स
अपने पीछे गुलाब छोड़ गया

नश्शा-ए-वस्ल अब भी बाक़ी है
जाने कैसी शराब छोड़ गया

ढूँडते फिर रहे हैं हम उस को
जब से अहद-ए-शबाब छोड़ गया

अहद-ए-रंगीं गुज़र गया 'राशिद'
पीछे फ़िक्र-ए-हिसाब छोड़ गया