उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-zabanon ki kahani ki zaban hote rahe

बे-ज़बानों की कहानी की ज़बाँ होते रहे

بے زبانوں کی کہانی کی زباں ہوتے رہے

शायर: Madhukar Jha Khuddar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-ज़बानों की कहानी की ज़बाँ होते रहे
हम तो यारो बारहा अश्क-ए-रवाँ होते रहे

दिल पे चाहे जितने ख़ंजर हो लगे ऐ जान-ए-जाँ
उस गली में हम सरासर राएगाँ होते रहे

जाम ऐसा डाल साक़ी ज़हर सा अब पीस कर
आज उस को देख सब जल्वे अयाँ होते रहे

जान मक़्तल पर लुटा दी बे-सबब 'ख़ुद्दार' ने
जुर्म उस के लन-तरानी से बयाँ होते रहे

इस नगर में बे-असर बादा-कशी 'ख़ुद्दार' की
वो न जाने किन ग़मों में ना-तवाँ होते रहे