उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-kahe be-sune KHuda-hafiz

बे-कहे बे-सुने ख़ुदा-हाफ़िज़

بے کہے بے سنے خدا حافظ

शायर: Mah Talat Zahidi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-कहे बे-सुने ख़ुदा-हाफ़िज़
जो भी गुज़रे उसे ख़ुदा-हाफ़िज़

दर्द रुक भी गया अगर तो क्या
है अजल सामने ख़ुदा-हाफ़िज़

लग़्ज़िशें सब मुआ'फ़ हों मेरी
वक़्त उजलत में है ख़ुदा-हाफ़िज़

इतनी नाराज़गी अरे तौबा
वो भी बीमार से ख़ुदा-हाफ़िज़

कम से कम मुड़ के देखिए साहब
ज़िंदगी कहती है ख़ुदा-हाफ़िज़

दर्द है या है मौत की दस्तक
बेबसी क्या करे ख़ुदा-हाफ़िज़

कार-ए-दुनिया तो ख़त्म होता नहीं
कहना ही पड़ता है ख़ुदा-हाफ़िज़