उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bata ye kaun si manzil hai ai umr-e-rawan mujhko

बता ये कौन सी मंज़िल है ऐ 'उम्र-ए-रवाँ मुझ को

بتا یہ کون سی منزل ہے اے عمر رواں مجھ کو

शायर: Dawood Khan Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बता ये कौन सी मंज़िल है ऐ 'उम्र-ए-रवाँ मुझ को
नज़र आता नहीं ख़ुद का भी अब साया जहाँ मुझ को

ये है 'अज़्म-ए-जवाँ मेरा नशेमन फिर बना लूँगा
जलाने का नहीं एहसास ऐ बर्क़-ए-तपाँ मुझ को

बिछड़ कर कारवाँ से मैं भटकता ही रहा हर सू
नज़र आई न मंज़िल और न गर्द-ए-कारवाँ मुझ को

मसीहा ज़हर दे दे या ईलाज-ए-दर्द-ओ-ग़म कर दे
कभी लेने न देगा चैन ये दर्द-ए-निहाँ मुझ को

'अज़ाइम ले के उठ्ठा हूँ अटल मेरे इरादे हैं
कभी नीचा दिखा सकता नहीं तू आसमाँ मुझ को

जहाँ शर्मिंदा-ए-ताबीर है फ़ितरत ज़माने की
ख़ुलूस-ए-आदमियत 'राज़' लाई है वहाँ मुझ को