उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bante hi shahr ka ye dekhiye viran hona

बनते ही शहर का ये देखिए वीराँ होना

بنتے ہی شہر کا یہ دیکھیے ویراں ہونا

शायर: S A Mehdi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बनते ही शहर का ये देखिए वीराँ होना
आँख खुलते ही मिरा दहर में गिर्यां होना

दिल की मेरे जो कोई शोमी-ए-क़िस्मत देखे
बावर आ जाए गुलिस्ताँ का बयाबाँ होना

चश्म-ओ-अबरू के लिए अश्क हैं साज़-ओ-नग़्मा
मेरा गिर्या मिरी आँखों का ग़ज़ल-ख़्वाँ होना

ज़ख़्म हैं लाला-ओ-गुल परतव-ए-सेहन-ए-गुलशन
देखिए दिल का मिरे रश्क-ए-गुलिस्ताँ होना

दश्त-ए-पैमाई से बे-ज़ार तमन्नाएँ हैं
बार है उन को मिरे क़ल्ब का मेहमाँ होना

इन में क्या फ़र्क़ है अब इस का भी एहसास नहीं
दर्द और दिल का ज़रा देखिए यकसाँ होना

अब नज़र आते हो मस्जिद में जनाब-ए-'मेहदी'
शेब में तुम को मुबारक हो मुसलमाँ होना