उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baiTha hun haar kar ab uThana nahin mujhe

बैठा हूँ हार कर अब उठाना नहीं मुझे

بیٹھا ہوں ہار کر اب اٹھانا نہیں مجھے

शायर: Faisal Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बैठा हूँ हार कर अब उठाना नहीं मुझे
कितना बुरा हूँ मैं ये बताना नहीं मुझे

हो सकता है वहीं से ही जुड़ जाए मेरा ख़्वाब
तुम बस ये करना आज जगाना नहीं मुझे

महसूस हो तुम्हें भी ज़रा लज़्ज़त-ए-फ़िराक़
मैं ने कहा भी था कि सताना नहीं मुझे

महसूस हो मुझे भी ज़रा तिश्नगी का दुख
ये चंद रोज़ तुम भी पिलाना नहीं मुझे

'फ़ैसल' तुम्हारी बातों में अब आना ही नहीं
तुम लाख ये कहो कि भुलाना नहीं मुझे