उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahut ab ho chuka girya chalo ab ghar ko jate hain

बहुत अब हो चुका गिर्या चलो अब घर को जाते हैं

بہت اب ہو چکا گریہ چلو اب گھر کو جاتے ہیں

शायर: Faisal Malik7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहुत अब हो चुका गिर्या चलो अब घर को जाते हैं
बहुत सी बातें करते हैं बहुत सा मुस्कुराते हैं

कभी फिर ये सियह रातें हमें तन्हा न पाएँगी
चलो हम साथ में मिल कर मिलन का गीत गाते हैं

ये शायद उन की फ़ितरत है या मुझ को ऐसा लगता है
बड़े ही मान से कुछ लोग दिल से खेल जाते हैं

हमें अच्छे थे वो दिन जब दिलों के रिश्ते सच्चे थे
ग़रज़ के सारे बंदे हैं ग़रज़ से मिलने आते हैं

हमें कुछ दोस्तों के साथ बीते पल नहीं भूले
हम आँखें मूँद लेते हैं तो वो पल लौट आते हैं

वो होगा इश्क़ या फिर होगी कोई उन की मजबूरी
किसी के दिल का आलम हम भला कब जान पाते हैं

ख़ुदा अपना जहाँ अपना ज़मीं अपनी फ़लक अपना
ये सब कुछ अपना है 'फ़ैसल' मगर हम भूल जाते हैं