उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDe yaqin se koi is intizar mein hai

बड़े यक़ीन से कोई इस इंतिज़ार में है

بڑے یقین سے کوئی اس انتظار میں ہے

शायर: Jagjit Kafir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़े यक़ीन से कोई इस इंतिज़ार में है
तिरा विसाल का वा'दा इसी बहार में है

कुछ और वक़्त लगेगा ज़रा तो सब्र करो
जो तिश्नगी का मसीहा है रेगज़ार में है

मैं अपने दिल को बचाऊँ तो किस तरह जानाँ
कहाँ बचेगा जो तेरी नज़र की मार में है

हर एक शय है मेरी जुस्तुजू के पहलू में
मेरी हयात मिरे ही तो इख़्तियार में है

मिरा सवाल है अब मो'जिज़ों के होने पर
ये ख़ाक अब भी शरारों के इंतिज़ार में है

बस एक लफ़्ज़ ने तारी किया था वज्द कोई
ये काएनात अभी भी उसी ख़ुमार में है

कोई तो पूछ के आए मक़ाम 'काफ़िर' का
सुख़नवरों के क़बीले में किस शुमार में है