उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahar rah ya ghar mein rah

बाहर रह या घर में रह

باہر رہ یا گھر میں رہ

शायर: Madhu Gupta7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बाहर रह या घर में रह
मेरे दिल-बंजर में रह

सहरा जंगल में मत जा
नींद मिरे बिस्तर में रह

मंज़िल मंज़िल धोका है
मेरे पाँव सफ़र में रह

बाहर जितना घूम के आ
कुछ अपने अंदर में रह

हद से बाहर पाँव न दे
अपनी ही चादर में रह

अपना जीना मरना क्या
क़ातिल मेरे ख़बर में रह

जैसे दिन जो मौसम हो
तू हर वक़्त नज़र में रह