उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni surat pe bhi nazar rakhiye

अपनी सूरत पे भी नज़र रखिए

اپنی صورت پہ بھی نظر رکھئے

शायर: Madhu Gupta5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी सूरत पे भी नज़र रखिए
आइना हाथ में अगर रखिए

आप पर जाँ निसार कर दें सब
बात बस ऐसी पुर-असर रखिए

इक ना इक दिन ये काम आयेगा
हाथ में अपने कुछ हुनर रखिए

प्यार कोई हँसी या खेल नहीं
आप पत्थर सा फिर जिगर रखिए

छाँव उन की बड़ी ही शीतल है
घर में बूढ़ा भी इक शजर रखिए