उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne lail-o-nahaar ki baaten

अपने लैल-ओ-नहार की बातें

اپنے لیل و نہار کی باتیں

शायर: Jafar Abbas9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने लैल-ओ-नहार की बातें
जब्र की इख़्तियार की बातें

हर तरफ़ कब से हो रही हैं यहाँ
गर्दिश-ए-रोज़गार की बातें

चार-सू याँ पे मौजज़न हैं सराब
ज़ीस्त के रेगज़ार की बातें

इक ज़माना गुज़र गया यूँही
हम हैं और दश्त-ए-ख़ार की बातें

इस कड़ी धूप में मज़ाहिब में
शजर-ए-साया-दार की बातें

जिस की इक भी झलक न देखी कभी
क्या हों उस पर्दा-दार की बातें

मत करो बे-हिसार की बातें
मत करो बे-कनार की बातें

ये जो प्यारी ज़मीं मिली है तुम्हें
बस करो इस दयार की बातें

गर करो अपने दिल की बात करो
हाँ इसी सोगवार की बातें