उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aazadi-e-KHayal ki wusat ko dekhiye

आज़ादी-ए-ख़याल की वुस'अत को देखिए

آزادئ خیال کی وسعت کو دیکھیے (ردیف .. م)

शायर: Ehqar Jhanswi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज़ादी-ए-ख़याल की वुस'अत को देखिए
रह कर ज़मीं पे करते हैं बात आसमाँ से हम

जीने की कुछ ख़ुशी है न मरने का कोई ख़ौफ़
आज़ाद इस तरह हुए हर दो-जहाँ से हम

ग़ालिब है दिल पे जोश व ज़ौक़-ए-सुख़न मिरे
दर्जा में कम नहीं किसी आतिश-ज़बाँ से हम

सत्तर बरस की 'उम्र जवानों से बढ़ के जोश
इस राज़ को छुपाए हैं अहल-ए-जहाँ से हम

अहबाब नुक्ता-संज सुख़न-दाँ चले गए
'अहक़र' हैं अब लगे फ़क़त हिन्दोस्ताँ से हम