उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aage jo hoga wo hoga KHair kar aaya hun main

आगे जो होगा वो होगा ख़ैर कर आया हूँ मैं

آگے جو ہوگا وہ ہوگا خیر کر آیا ہوں میں

शायर: Ejazulhaq Shahab7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आगे जो होगा वो होगा ख़ैर कर आया हूँ मैं
जो ज़बर बनते थे उन को ज़ेर कर आया हूँ मैं

हाँ बहुत मुश्किल तो है लेकिन ये ना-मुम्किन नहीं
दर्द की तुग़्यानियों में तैर कर आया हूँ मैं

मर गया है कोई मुझ में उस पे मिट्टी डालिए
अपनी सारी ख़्वाहिशों को ढेर कर आया हूँ मैं

दर्द वहशत रंज-ओ-ग़म तन्हाइयाँ शाम-ए-अलम
जो मुझे घेरे थीं उन को घेर कर आया हूँ मैं

वो जिसे पाने की हसरत दिल में मुद्दत से रही
उस के ही ख़ातिर उसे अब ग़ैर कर आया हूँ मैं

काम ये आसाँ नहीं इस में कलेजा चाहिए
इश्क़ की वादी से हाँ रुख़ फेर कर आया हूँ मैं

जाने किस की दीद की हसरत लिए दिल में 'शहाब'
दश्त-ओ-सहरा से भी आगे सैर कर आया हूँ मैं