उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun bagh koi humne ujaDta nahin dekha

यूँ बाग़ कोई हम ने उजड़ता नहीं देखा

یوں باغ کوئی ہم نے اجڑتا نہیں دیکھا

शायर: Yashpal Gupta6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ बाग़ कोई हम ने उजड़ता नहीं देखा
मुद्दत से किसी फूल का चेहरा नहीं देखा

इस शहर में शायद कोई दिल वाला नहीं है
जो हुस्न कहीं बनता सँवरता नहीं देखा

सय्याद से गुल करते रहे जान का सौदा
माली ने लहू का कोई दरिया नहीं देखा

जो सुख के उजाले में था परछाईं हमारी
अब दुख के अँधेरे में वो साया नहीं देखा

इदराक की सरहद पे कई बार गया हूँ
जो हद से गुज़र जाता वो लम्हा नहीं देखा

ख़ुद्दारी-ए-इंसाँ को अमाँ कैसे मिलेगी
मुद्दत से ज़माने में मसीहा नहीं देखा