उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jhuTon ka zamana hai koi sach baat mat kahna

ये झूटों का ज़माना है कोई सच बात मत कहना

یہ جھوٹوں کا زمانہ ہے کوئی سچ بات مت کہنا

शायर: Qamar Naqvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये झूटों का ज़माना है कोई सच बात मत कहना
चुनाँचे रात बे-शक हो मगर तुम रात मत कहना

जराएम से तुम्हारे कोई पर्दा ख़ाक उठाएगा
नफ़ी करते रहो सख़्ती से तुम इसबात मत कहना

ज़मीर इक ऐसी दौलत है कि जो मुश्किल से मिलती है
किसी को अपने मुँह से क़िबला-ए-हाजात मत कहना

यही तो आज-कल मज्ज़ूब होने की अलामत है
कि हाल-ए-ग़ैब कहना अम्र-ए-मौजूदात मत कहना