उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahi nahin ki faqat pyar karne aae hain

यही नहीं कि फ़क़त प्यार करने आए हैं

یہی نہیں کہ فقط پیار کرنے آئے ہیں

शायर: Aaga nisaar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यही नहीं कि फ़क़त प्यार करने आए हैं
हम एक उम्र का तावान भरने आए हैं

वो एक रंग मुकम्मल हो जिस से तेरा वजूद
वो रंग हम तिरे ख़ाके में भरने आए हैं

ठिठुर न जाएँ हम इस इज्ज़ की बुलंदी पर
हम अपनी सत्ह से नीचे उतरने आए हैं

ये बूँद ख़ून की लौह-ए-किताब-ए-रुख़ के लिए
ये तिल सर-ए-लब-ओ-रुख़्सार धरने आए हैं

लगा रहे हैं अभी ख़ेमे ग़म की वादी में
हम इस पहाड़ से दामन को भरने आए हैं

तिरे लबों को मिली है शगुफ़्तगी गुल की
हमारी आँख के हिस्से में झरने आए हैं

'निसार' बंद-ए-क़बा खोलना मुहाल न था
सो हम जमाल-ए-क़बा बंद करने आए हैं