उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaro qasam hai tumko kahin justuju karo

यारो क़सम है तुम को कहीं जुस्तुजू करो

یارو قسم ہے تم کو کہیں جستجو کرو

शायर: Daulat Aasiri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यारो क़सम है तुम को कहीं जुस्तुजू करो
क़ातिल मिरे को मुझ से ज़रा रू-ब-रू करो

चाहो नमाज़ हज़रत-ए-गुल की अदा करो
ऐ बुलबुलो तुम अश्क से अव्वल वुज़ू करो

इस चश्म-ए-मय-परस्त का मारा गया है जो
लाज़िम है उस की ख़ाक से ख़ुम या सुबू करो

हम को हमारे यार के जल्वे से काम है
ऐ ज़ाहिदो बहिश्त की तुम आरज़ू करो