उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad raaton mein aa gaya koi

याद रातों में आ गया कोई

یاد راتوں میں آ گیا کوئی

शायर: Faiz rahil Khan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद रातों में आ गया कोई
रात मुझ को रुला गया कोई

मुझ को सीने से मत लगा साक़ी
मुझ में काँटे बिछा गया कोई

ऐ हवा जा उसे ख़बर कर दे
अपना वा'दा निभा गया कोई

सब को हिस्सा मिला था लेकिन क्यूँ
मेरे हिस्से को खा गया कोई

तेरे रोने की एक वज्ह तो है
मुझ को यूँ ही रुला गया कोई

मेरी ग़लती नहीं है ऐ पत्थर
मुझ को पागल बना गया कोई