उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumko hai yaro agar husn-e-bayan ki ehtiyat

तुम को है यारो अगर हुस्न-ए-बयाँ की एहतियात

تم کو ہے یارو اگر حسن بیاں کی احتیاط

शायर: Ijad Burhanpuri3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम को है यारो अगर हुस्न-ए-बयाँ की एहतियात
ज्यूँ क़लम हर बात में कीजिए ज़बाँ की एहतियात

आँसुओं के कर चुका हूँ मैं हवाले आह को
हर कहीं है फ़ौज के ज़िम्मे निशाँ की एहतियात

एहतियातें करते करते मर चुके 'ईजाद' हम
अब जो नौबत जान पर आई कहाँ की एहतियात