उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum jo daman zara bhigo lete

तुम जो दामन ज़रा भिगो लेते

تم جو دامن ذرا بھگو لیتے

शायर: Rabia Basri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम जो दामन ज़रा भिगो लेते
हम भी कुछ देर खुल के रो लेते

इक तिरी याद जो हमारी थी
इक तिरा दर्द जो बिछो लेते

आलम-ए-मस्ती-ओ-तरब में रहे
ख़ाक की तीरगी में सो लेते

हर्फ़ ख़ुशबू के रंग में लिखती
फूल गजरों में जो पिरो लेते

ना-रसाई तो ख़ैर क़िस्मत थी
और क्या बच गया जो खो लेते

कूँज कर ला रही थी सहरा में
आब-ओ-दाना वहाँ भी बो लेते

मिट रही हूँ रह-ए-हज़ीमत में
अपने हाथों से ही डुबो लेते

रात की शाल ओढ़ कर यूँ हम
रेग-ए-राह-ए-रवाँ ही हो लेते

साँस अपनी महक महक जाती
हाथ से फूल तेरे जो लेते