उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tanhai ka rog na pal

तन्हाई का रोग न पाल

تنہائی کا روگ نہ پال

शायर: Ejaaz Talib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तन्हाई का रोग न पाल
घर से बाहर पावँ निकाल

जिन में हो ज़हरीला-पन
ऐसी बातें हँस कर टाल

शहर में वहशी आए हैं
चल जंगल में डेरा डाल

अंदर से हैं बिखरे बिखरे
और बाहर से सब ख़ुश-हाल

आँखें सब की फ़िक्र-ज़दा
कैसे बीतेगा ये साल

'तालिब' प्यास बुझे कैसे
एक नदी और सौ घड़ियाल