उर्दू शायरी · ग़ज़ल

siyah shaal pe jo ashk kaDhta hoga

सियाह शाल पे जो अश्क काढ़ता होगा

سیاہ شال پہ جو اشک کاڑھتا ہوگا

शायर: Rabia Basri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सियाह शाल पे जो अश्क काढ़ता होगा
किसे ख़बर थी उसे मुझ से मसअला होगा

जो मेरे होते बिछड़ने की बात करता था
मिरी जुदाई में इक बार रो दिया होगा

ज़मीं पे फैले ये काग़ज़ गवाही देते हैं
वो कुछ न कुछ तो मिरे नाम लिख रहा होगा

फ़ज़ा उदास है महताब है मलूल कि अब
वो ज़र्द चेहरे को हाथों में भर रहा होगा

मैं इस लिए भी बहुत मुतमइन थी दूरी से
वो दूर होगा मगर मुझ को देखता होगा

मुझे भी दूसरे काँधे ने कुछ सहारा दिया
कहीं से मौक़ा उसे भी तो मिल गया होगा