उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shahr-e

शहर-ए

شہر غزل میں بکنے کو تیار کون ہے

शायर: Raees Akhtar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शहर-ए-ग़ज़ल में बिकने को तय्यार कौन है
यूसुफ़ नहीं तो ज़ीनत-ए-बाज़ार कौन है

सब के लबों पे नारा-ए-मंसूर है मगर
ये देखना है आज सर-ए-दार कौन है

अपना ज़मीर झूट कभी बोलता नहीं
तुम ही कहो कि साहब-ए-किरदार कौन है

तर्क-ए-तअल्लुक़ात को इक उम्र हो गई
तन्हाइयों में माइल-ए-गुफ़्तार कौन है

तस्वीरें रोज़ बनती हैं शे'रों की शक्ल में
मेरे तसव्वुरात का शहकार कौन है

जलने को शम्अ' भी जली परवाना भी जला
कैसे कहें कि किस का वफ़ादार कौन है

हम लोग ख़ानक़ाहों में जाएँगे किस तरह
सब पारसा हैं हम सा गुनहगार कौन है

अश्कों के फूल ले के मैं निकला तो हूँ 'रईस'
ये देखना है उन का ख़रीदार कौन है