उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saqi mujhe shabab ka rasiya kahe so hun

साक़ी मुझे शबाब का रसिया कहे सो हूँ

ساقی مجھے شباب کا رسیا کہے سو ہوں

शायर: Danish Nazeer Dani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साक़ी मुझे शबाब का रसिया कहे सो हूँ
मैं ख़ुद से बे-नियाज़ हूँ जैसा कहे सो हूँ

मेरी हवस के अंदरूँ महरूमियाँ हैं दोस्त
वामाँदा-ए-बहार हूँ घटिया कहे सो हूँ

अब मैं किसी की सोच बदलने से तो रहा
ये शहर-ए-बद-गुमाँ मुझे शैदा कहे सो हूँ

तू ही बता मैं अपनी सफ़ाई में क्या कहूँ
तू बात बात में मुझे झूटा कहे सो हूँ

'दानिश' ख़ुद-एहतिसाबी का मुझ में नहीं दिमाग़
मुँह-फट हूँ बद-मिज़ाज हूँ दुनिया कहे सो हूँ