उर्दू शायरी · ग़ज़ल

samne aao ki main chehra-e-zeba dekhun

सामने आओ कि मैं चेहरा-ए-ज़ेबा देखूँ

سامنے آؤ کہ میں چہرۂ زیبا دیکھوں

शायर: Mahboob Dehlavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सामने आओ कि मैं चेहरा-ए-ज़ेबा देखूँ
और इस आईने में अक्स फिर अपना देखूँ

तुम ही मंज़िल हो तुम ही गौहर-ए-मक़्सूद मिरा
देख कर तुम को मैं क्या और तमाशा देखूँ

तुम ही बतलाओ कि इस कार-गह-ए-हस्ती में
क्या न देखूँ मैं अगर देखूँ तो क्या क्या देखूँ

तुझ को ये नाज़ कोई पा न सकेगा हरगिज़
मुझ को ये ज़िद कि तिरा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा देखूँ

तू ने चाहा तो बहुत गर्दिश-ए-अय्याम कि मैं
ख़ुद तमाशा बनूँ अपना ही तमाशा देखूँ

काश इस ज़ीस्त में वो वक़्त भी आए 'महबूब'
चार सू दहर में ईमाँ का उजाला देखूँ