उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rind-e-baada-nosh jis ka mai-kade mein nam tha

रिंद-ए-बादा-नोश जिस का मय-कदे में नाम था

رند بادہ نوش جس کا مے کدے میں نام تھا

शायर: Faiz Rahmani Faiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रिंद-ए-बादा-नोश जिस का मय-कदे में नाम था
साक़िया महफ़िल में तेरी वो ही तिश्ना-काम था

इस जहान-ए-आरज़ू में आश्ना कोई न था
था अगर कुछ आश्ना तो दर्द-ए-बे-आराम था

आज क्यों अज़्मत का परचम है हमारा सर-निगूँ
बाम-ओ-दर पर शहर के कल तक इसी का नाम था

जलते रहना कीना-ओ-बुग़्ज़-ओ-हसद की आग में
क्या तिरे अस्लाफ़ का ऐ दिल यही पैग़ाम था

हर तरफ़ सूना समाँ था ख़ामुशी का राज था
जो भी तैर-ए-ख़ुश-नवा था वो असीर-ए-दाम था

मा-सिवा इस नीम-जाँ और बे-कस-ओ-नादार के
'फ़ैज़' तेरा था सभी पर और लुत्फ़-ए-आम था