उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ranjish hi sahi dil hi dukhane ke liye aa

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ

رنجش ہی سہی دل ہی دکھانے کے لیے آ

शायर: Ahmad Faraz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

कुछ तो मिरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिए आ

पहले से मरासिम न सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रह-ए-दुनिया ही निभाने के लिए आ

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

इक 'उम्र से हूँ लज़्ज़त-ए-गिर्या से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को रुलाने के लिए आ

अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्‌म को तुझ से हैं उमीदें
ये आख़िरी शम'एँ भी बुझाने के लिए आ