उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qadam qadam pe hai raqsan udasiyon ka jhunD

क़दम क़दम पे है रक़्साँ उदासियों का झुण्ड

قدم قدم پہ ہے رقصاں اداسیوں کا جھنڈ

शायर: Ghausiya Khan Sabeen4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़दम क़दम पे है रक़्साँ उदासियों का झुण्ड
नफ़स नफ़स में उतरता है सिसकियों का झुण्ड

हमारे दिल की उदासी किसी को क्या मा'लूम
हमीं समझ न सके क्यूँ है हिचकियों का झुण्ड

तुम्हारा साथ ही चाहा था क्या गुनाह किया
उमड पड़ा था क्यूँ राहों में बिजलियों का झुण्ड

'सबीन' मुझ को भी लाहक़ है मौत का ख़तरा
मिरे भी साथ है यूसुफ़ के भाइयों का झुण्ड