उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phulon ki KHwahish mein aksar kanTon ko apnate hain

फूलों की ख़्वाहिश में अक्सर काँटों को अपनाते हैं

پھولوں کی خواہش میں اکثر کانٹوں کو اپناتے ہیں

शायर: Balraj Kumar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूलों की ख़्वाहिश में अक्सर काँटों को अपनाते हैं
आदत से मजबूर हैं अपना दामन ख़ुद उलझाते हैं

एक नज़र उन की ख़ातिर भी एक नज़र उन की जानिब
मौसम-ए-गुल में जो दीवाने मातमी नग़्मे गाते हैं

सीप के बाहर पानी क्या मुफ़्लिस का मैला आँचल क्या
सोने पर टपके आँसू भी ताज-महल बन जाते हैं

पिछले सावन में पल-पल जलते रहने का हुक्म मिला
अब के तेरे देस के बादल क्या संदेसा लाते हैं

दर्द के सहराओं के आगे प्यार के मीठे चश्मे हैं
ख़्वाबों के सौदागर जाने क्या क्या ख़्वाब दिखाते हैं

लोग ये कैसे हैं जो हम से दिन में आँख चुराते हैं
शाम ढले तो ले कर साग़र पीने पिलाने आते हैं