उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phir lab pe tera zikr hai phir tera nam hai

फिर लब पे तेरा ज़िक्र है फिर तेरा नाम है

پھر لب پہ تیرا ذکر ہے پھر تیرا نام ہے

शायर: Yahya Amjad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फिर लब पे तेरा ज़िक्र है फिर तेरा नाम है
फिर जाँ लुटाने वालों का इक इज़िदहाम है

सिब्त-ए-रसूल होना ही इज़्ज़त की बात है
पर उस से बढ़ के तेरे अमल का मक़ाम है

रस्म-ए-यज़ीद ज़ुल्म है हर बार आरज़ी
दीन-ए-हुसैन जिद्द-ओ-जहद है मुदाम है

है हर्ब-ए-इश्क़ फ़त्ह की ख़्वाहिश से बे-नियाज़
ये बात अलग कि हार के भी फ़त्ह नाम है

क्या ग़म अगर यज़ीद रहा इक़्तिदार में
परचम तो फिर हुसैन का मीर-ए-अवाम है

परचम बना है फिर कई शहरों में तेरा नाम
तू कारवान-ए-जिद्द-ओ-जहद का इमाम है