उर्दू शायरी · ग़ज़ल

patthar ki hatheli pe koi phul uga de

पत्थर की हथेली पे कोई फूल उगा दे

پتھر کی ہتھیلی پہ کوئی پھول اگا دے

शायर: Parkash Fikri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पत्थर की हथेली पे कोई फूल उगा दे
ज़र्रों की तब-ओ-ताब से सूरज को जला दे

अल्फ़ाज़ के सीने में हुमकते हुए ख़ूँ से
काग़ज़ पे किसी ख़्वाब की तस्वीर बना दे

उतरा है पहाड़ों से ग़ज़बनाक अंधेरा
ऐसे में कोई चीख़ के मुझ को न डरा दे

गलियों में हवा रात को रोती है अकेली
फैले हुए जंगल की उसे राह बता दे

है दूर बहुत दूर वो सरसब्ज़ जज़ीरा
जाएगा वहाँ कौन कि थकते हैं इरादे

साहिल पे तिरे साथ था 'फ़िक्री' तो हुआ क्या
मौजों में कभी डूब के तू उस को सदा दे