उर्दू शायरी · ग़ज़ल

parinda hadd-e-nazar tak jo aasman mein hai

परिंदा हद्द-ए-नज़र तक जो आसमान में है

پرندہ حد نظر تک جو آسمان میں ہے

शायर: Ghani Ejaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

परिंदा हद्द-ए-नज़र तक जो आसमान में है
परों में ज़ोर कहाँ हौसला उड़ान में है

अभी से भीग रहा है हदफ़ पसीने में
कि तीर छूटा नहीं है अभी कमान में है

गिरेगी कौन सी छत पे ये कब किसे मालूम
कटी पतंग हवाओं के इम्तिहान में है

सुकून-ए-क़ल्ब को महलों में ढूँडने वालो
सुकून-ए-क़ल्ब फ़क़ीरों के ख़ानदान में है

ख़रीदना है जो तोहफ़ा तुम्हें मोहब्बत का
मिलेगा दिल के एवज़ दर्द की दुकान में है

हयात-ओ-मौत फ़क़त नाम घर बदलने का
समेट रक्खा है सामान साएबान में है