उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle chingari se ek shola banata hai mujhe

पहले चिंगारी से इक शोला बनाता है मुझे

پہلے چنگاری سے اک شعلہ بناتا ہے مجھے

शायर: Obaidullah Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले चिंगारी से इक शोला बनाता है मुझे
फिर वही तेज़ हवाओं से डराता है मुझे

बैन करते हुए इस रात के सन्नाटे में
दश्त से घर की तरफ़ कौन बुलाता है मुझे

गर्द होते हुए चेहरे से मिलाने के लिए
आइना-ख़ाने में कोई लिए जाता है मुझे

शाम होती है तो मेरा ही फ़साना अक्सर
वो जो टूटा हुआ तारा है सुनाता है मुझे

रेग-ए-सहरा से तअल्लुक़ को बढ़ा देता है
ख़्वाब में जब भी वो दरिया नज़र आता है मुझे