उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahaDon se utarti sham ki bechaargi dekhen

पहाड़ों से उतरती शाम की बेचारगी देखें

پہاڑوں سے اترتی شام کی بے چارگی دیکھیں

शायर: Parkash Fikri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहाड़ों से उतरती शाम की बेचारगी देखें
दरख़्तों पर लरज़ कर बुझ रही हैं आख़िरी किरनें

बहुत ही सर्द है अब के दयार-ए-शौक़ का मौसम
चलो गुज़रे दिनों की राख में चिंगारियाँ ढूँडें

भला पत्थर भी रोते हैं कभी शीशे के ज़ख़्मों पर
अगर होता है ऐसा तो हिसाब-ए-दोस्ताँ भूलें

सवाद-ए-शाम में ढूँडें कोई मानूस सा चेहरा
हवा की रहगुज़र पे एक नन्हा सा दिया रक्खें

कहाँ अल्फ़ाज़ देते हैं हमारा साथ अब 'फ़िक्री'
कहे अश'आर सब बे-जाँ हुईं बेकार सब ग़ज़लें