उर्दू शायरी · ग़ज़ल

paDhi gai na wo tahrir-e-gham jabinon se

पढ़ी गई न वो तहरीर-ए-ग़म जबीनों से

پڑھی گئی نہ وہ تحریر غم جبینوں سے

शायर: Faheem Jogapuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पढ़ी गई न वो तहरीर-ए-ग़म जबीनों से
जो पोंछती रही अश्कों को आस्तीनों से

कभी न देगी सहारा शिकस्तगी दिल की
सफ़र न कीजिए टूटे हुए सफ़ीनों से

तिरे ख़याल की बारिश में भीगने के लिए
तरस रहे हैं असीरान-ए-दिल महीनों से

समझ न पाएँगे ये ज़ाहिदान-ए-सादा दिल
दिलों में आग भड़कती है आबगीनों से

शिकस्त-ए-जाम मुक़द्दर को मानने वाले
शराब कोई हो बनती है वो पसीनों से

बुझे चराग़ सितारों के दिल लरज़ उट्ठे
निगार-ए-सुब्ह उतरने लगी है ज़ीनों से

उन्हें सँभालने में उम्र कट गई है 'फहीम'
हमारी सीपियाँ कुछ कम नहीं नगीनों से