उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nai jafa ka mujhe ab to koi bab na de

नई जफ़ा का मुझे अब तो कोई बाब न दे

نئی جفا کا مجھے اب تو کوئی باب نہ دے

शायर: Parvez Ahmad Parvez5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नई जफ़ा का मुझे अब तो कोई बाब न दे
मैं जिस को पढ़ के बहक जाऊँ वो किताब न दे

ख़ुदा बना तो लिया मैं ने एक पत्थर को
सवाल कैसे करूँ जब कि वो जवाब न दे

उगा दे दर्द का सूरज हमारे घर में मगर
जला दे रौशनी जिस की वो माहताब न दे

चमन चमन में वो फूलों का बादशाह सही
मगर जो रंग मिरा ज़ख़्म दे गुलाब न दे

चुभे जो ख़ार की मानिंद हर-नफ़स 'परवेज़'
सता ले मुझ को मगर कोई ऐसा ख़्वाब न दे