उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mukaddar hi tha kuchh aisa hamara

मुकद्दर ही था कुछ ऐसा हमारा

مکدر ہی تھا کچھ ایسا ہمارا

शायर: Chandni Pandey7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुकद्दर ही था कुछ ऐसा हमारा
सफ़र कटता रहा तन्हा हमारा

कई चेहरों का ग़म है इस में शामिल
हमारा है कहाँ चेहरा हमारा

वो भूले और हम भूले न उन को
तअ'ल्लुक़ है यही उन का हमारा

हमें मंज़िल पे आ कर ये ख़लिश है
पलट जाते तो क्या जाता हमारा

निभाने की मुसलसल कोशिशों में
बिगड़ता ही गया रिश्ता हमारा

चिढ़ाता है कोई लहरों को अक्सर
बना कर रेत पर नक़्शा हमारा

है अपनी 'चाँदनी' ही चार दिन की
बिगाड़ेगी ही क्या दुनिया हमारा