उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe talash thi jis ki wahi kabhi na mili

मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली

مجھے تلاش تھی جس کی وہی کبھی نہ ملی

शायर: Chandni Pandey8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस शीर्षक की यह संग्रह प्रविष्टि 1 है। समान शीर्षक के रिकॉर्ड में पाठ या श्रेय का अंतर है; इसे स्वतंत्र आधिकारिक संस्करण का दावा न मानें। अन्य संग्रह प्रविष्टि 1

मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली
हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली

तिरी तलाश में पैरों में पड़ गए छाले
मगर ऐ मंज़िल-ए-मक़्सूद तू कभी न मिली

ख़ुशी से दोस्ती मेरी भी थी मगर इक दिन
ख़फ़ा हुई वो कुछ ऐसी के फिर कभी न मिली

वो जिस चराग़ के दम से मकान रौशन था
उसी चराग़ को ख़ुद अपनी रौशनी न मिली

तुम्हारे हिज्र में ऐसा भी वक़्त आया है
बदन टटोल के देखा तो नब्ज़ ही न मिली

ये जिस्म है के फ़क़त शोर गुल है साँसों का
ये आँख है के कोई ख़्वाब देखती न मिली

दिल-ओ-दिमाग़ पे हावी रहा ग़म-ए-दौराँ
ख़ुशी के साथ भी रह कर मुझे ख़ुशी न मिली

मुझे न मिल सका सूरज मिरे मुक़द्दर का
तिरा नसीब तुझे मेरी 'चाँदनी' न मिली