उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe lagte hain pyare titliyan jugnu parinde

मुझे लगते हैं प्यारे तितलियाँ जुगनू परिंदे

مجھے لگتے ہیں پیارے تتلیاں جگنو پرندے

शायर: Zafar Khan Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे लगते हैं प्यारे तितलियाँ जुगनू परिंदे
ये ज़िंदा इस्तिआरे तितलियाँ जुगनू परिंदे

यहीं मिलती हैं धरती की हदें बाग़-ए-इरम से
वो देखो अब्र-पारे तितलियाँ जुगनू परिंदे

बस इक तुम ही नहीं मंज़र में वर्ना क्या नहीं है
सुराही चाँद तारे तितलियाँ जुगनू परिंदे

अभी ये कौन आया सेहन-ए-गुल में धीरे धीरे
अड़े ख़ुशबू के धारे तितलियाँ जुगनू परिंदे

यहाँ ख़तरे में है ख़ुद आदमी की ज़ात अपनी
जिएँ किस के सहारे तितलियाँ जुगनू परिंदे

किताब-ए-ज़िंदगी की ये मुक़द्दस आयतें हैं
हिरन चीतल चिकारे तितलियाँ जुगनू परिंदे

'ज़फ़र' ये कौन हम से छीन कर बचपन हमारा
उड़ाता है ग़ुबारे तितलियाँ जुगनू परिंदे