उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat raegani hai sambhal ja

मोहब्बत राएगानी है सँभल जा

محبت رائیگانی ہے سنبھل جا

शायर: Rabia Basri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत राएगानी है सँभल जा
अज़िय्यत की कहानी है सँभल जा

तुझे मीरास में हिजरत मिली है
तभी तो ला-मकानी है सँभल जा

मोहब्बत जान को आई हुई है
बला-ए-ना-गहानी है सँभल जा

ये बर्क़ी राब्ते से कट न जाए
ये रिश्ता आसमानी है सँभल जा

इसे दरिया समझ कर पार मत कर
मिरी आँखों का पानी है सँभल जा

ये आँखें सुर्ख़ ये पैरों के छाले
किसी की मेहरबानी है सँभल जा

वो मेरे गाँव के रस्ते में होगा
अभी भी ख़ुश-गुमानी है सँभल जा