उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ka koi to paiman hota

मोहब्बत का कोई तो पैमान होता

محبت کا کوئی تو پیمان ہوتا

शायर: Yaseen Bhatti6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत का कोई तो पैमान होता
कि जिन पे हमें भी बहुत मान होता

कभी इतने अर्ज़ां न होते जहाँ में
हमें ज़िंदगी का जो इरफ़ान होता

तुझे काश रखते तसव्वुर में अपने
कि इन के बहलने का सामान होता

रह-ए-ज़िंदगी में कभी न कभी तो
तुझे ढूँड लेते जो इम्कान होता

किसी से तअ'ल्लुक़ बनाते न इतना
किसी से न मिलने का अरमान होता

अगर अपनी मिट्टी पे 'यासीन' रहते
कहाँ हिजरतों का ये तूफ़ान होता