उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere junun ko hai tujhse sabaat phir milna

मिरे जुनूँ को है तुझ से सबात फिर मिलना

مرے جنوں کو ہے تجھ سے ثبات پھر ملنا

शायर: Yasmeen Habeeb6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे जुनूँ को है तुझ से सबात फिर मिलना
मिरी नज़र की हसीं काएनात फिर मिलना

कभी जो दिन के उजाले में आ न पाए अगर
तो शौक़-ए-दीद में जागेगी रात फिर मिलना

बस एक तू ही बहाना हुआ है जीने का
वगर्ना दर्द है सारी हयात फिर मिलना

हज़ार रंग हैं तेरे कि मुझ से लिपटे हैं
जिलौ में ले के धनक की बरात फिर मिलना

सुनी हुई है तिरी आँख की ज़बाँ मैं ने
तुझे सुना सकूँ इस दिल की बात फिर मिलना

चटख़ चटख़ के मिरे होंट दे रहे हैं सदा
फिर आना लौट के जू-ए-फ़ुरात फिर मिलना