उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mauj-e-dariya ki tarah tum bhi ubalna sikho

मौज-ए-दरिया की तरह तुम भी उबलना सीखो

موج دریا کی طرح تم بھی ابلنا سیکھو

शायर: Ehsas Gayawi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौज-ए-दरिया की तरह तुम भी उबलना सीखो
बात तो जब है कि ख़ुद गिर के सँभलना सीखो

कौन मिल जाए कहाँ राह का पत्थर बन कर
शर्त ये है कि इसी राह पे चलना सीखो

क्यों हो ख़ामोश भला झील के पानी की तरह
मिस्ल-ए-तूफ़ान ज़रा तुम भी मचलना सीखो

हो तो सकता है कि हर मोड़ पे नाकामी हो
अज़्म-ओ-दानाई से हालात बदलना सीखो

किसी तारीकी का एहसास न होने पाए
शम्अ की तरह हर इक गाम पे जलना सीखो